June 8, 2010

वो  कदम

उस ओर से उठे, नज़दीक आये और ठहरे दो पल,
फिर चल दिए, बढ़ गए आगे, नयी दिशा में 
खो गए दुनिया की रंगीनियों में वो दो कदम
और इस रास्ते पे खड़ा बस देखता ही रहा मैं.


बढ़  जाउंगा मैं भी एक दिन,
कब तक ठहरा (देखता) रहूंगा यूँ 
खो रहूँगा भीड़ में दुनिया की, मैं भी,
मील का पत्थर आखिर मैं नहीं.


started from that side, came closer, and stayed for two moments,
then started again, moved ahead/on in a new direction
were/got lost (mingled) in the pleasures of life, those two steps (feet)
and standing on this path I just kept seeing (seeing all this happen)

move ahead/on I too will one day

until when will I stand (looking) like this
I too will get lost in the crowds
a milestone, after all, I am not

1 comment:

  1. आगे बढ़ने का ही नाम ज़िंदगी है! बजा फरमाया.....

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